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मेरे साफ़ कमरे की कहानी

कुंवारी बिधवा

धूमिल उम्मीदें शहर बसाने की ...

इस आधी रात में

फिर भी हिंद को बदलना है...

ख़ुशी मुझे है...

माँ

कभी हम अनजान थे

असीम ख़ामोशी....

मतलबी