Monday, January 09, 2012

मतलबी

ना वो मेरा रास्ता है ...
ना ही वो मेरी मंजिल है ....
फिर क्यूँ उन राहों में चले जा रहा हूँ ....
ना वो मेरा दोस्त है ...
ना ही वो मेरा सगा है ...
फिर क्यूँ उस को अपना कहे जा रहा हूँ ...
घिन आती है खुद पे ... और इस जिंदगी पे ...
इतना मतलबी बना गयी मुझे को ....
की अपनी माँ से भी उस के प्यार की वजह पूछ रहा हूँ ...

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