Sunday, February 09, 2014

मैं वो और हमारा रिश्ता

वो बहुत सुन्दर थी और मैं दूर से सूप की चुस्कियां लेते हुए उसे डी.जे. पर डांस करते हुए देख रहा था, मौका मेरे एक दूर की रिश्तेदार की बेटी की शादी का था| काफी देर से उसे देख रहा था तो शायद उसे इस बात का एहसास हो गया और अचानक हमारी नज़रें मिली और दोनों ने ही नज़रें चुरा ली, मेरा अब उसे छुप छुप के देखने का दौर शुरू हुआ, और मैंने गौर किया कि अब वो भी मुझे देख रही थी| शादी की रश्मे चल रही थी जयमाला हो चुकी थी बाहरी मेहमान खाना खा कर निकल चुके थे| मैं मुंबई से सेमेस्टर ब्रेक में घर आया था तो मम्मी पापा के साथ दिल्ली इस शादी में चला आया, अब दूल्हा दुल्हन के खाने का दौर चला मैंने देखा कि वो लड़की दुल्हन के साथ ही खाना खा रही थी मेरी मौसी की बेटी ने मुझे भी खाना खाने बैठा दिया, और इत्तेफाकन मैं उस के बगल में बैठा और पहली ढंग की सोशली स्माइल हम दोनों ने आपस में पास की| खाना खाने के बाद फेरों की रश्म के लिए अभी वक़्त था तो हम सब दूल्हा दुल्हन की तरफ वाले आपस में बैठ पर मस्ती मार रहे थे कि अचानक मेरा फोन बजा वक़्त तक़रीबन एक बज रहा था, दोस्त का था और उसे कुछ मदद चाहिए थी तो मैं फोन सुनने अलग आया फोन सुन कर जब मैं वापस आया तो देखा उस ग्रुप में वो नहीं थी नज़रें इधर उधर दौड़ई तो देखा कि वो अगल से बैठी हुई थी मैंने भी वापस ग्रुप में जाना ठीक नहीं समझा और मैं उस की तरफ चल पड़ा, मैंने कुर्सी ली और उस के बगल में आकर पूछा – बैठ सकता हूँ उस ने कहा- हाँ स्यौर
और थोडा बहुत बातचीत का दौर शुरू हुआ उस ने पूछा कि तुम मुझे छुप छुप के देख रहे थे, तो मैंने भी कहा तुम्हारी नज़रें भी हमेशा उस तरफ कुछ खोज रही थी जिस तरफ मैं बैठा होता था... और इसी बात पर दोनों हंस पड़े...
दोनों की सिर्फ नज़रें आपस में नहीं टकराई थी बल्कि दिल में भी कुछ सिग्नल गये थे और रात भर फेरे देखते देखते और उस के आगे पीछे का वक़्त हम दोनों ने साथ गुजारा और एक दुसरे को समझने की कोशिश की पर जहाँ लोगों को एक दुसरे को समझने में पूरी ज़िन्दगी लग जाती है वहां एक रात में हम दोनों कौन से कद्दू में तीर मार देते? खैर हम दोनों ने ही एक दुसरे के साथ सुहाना वक़्त गुजारा..

और सुबह हो गयी विदाई की तैयारियां होने लगी, मेरे मम्मी पापा भी गेस्ट हाउस से दुल्हन के घर पर आ गये थे और मैं थोडा पापा से मिलने गया ये पूछने कि वापस जाने का क्या प्लान है ?
मैं पापा के साथ खड़ा ही था कि एक अंकल पापा से मिले, दोनों आपस में गले मिले और मैंने भी इन्फोर्मल्ली नमस्ते कर दिया, तो पापा ने टोक दिया रवि बेटा पांव छूओ मौसा जी के, ये तुम्हारे गोरखपुर वाले मौसा जी है मौसी भी आई है.. तो मैंने पांव छुवे और तभी एक औरत को मम्मी ने कहा ये मौसी है तो मैंने उन्हें भी नमस्ते किया| पापा ने उन से घर वर के बारे में पूछा और उन के बच्चों के बारे में भी और कहा कि अब तो डिम्पी बड़ी हो गयी होगी तो मौसा जी ने जवाब दिया हाँ काफी बड़ी हो गयी है आप ने तो बचपन में ही देखा था और उन्होंने आवाज़ दे कर एक लड़की को बुलाया और उसे कहा कि डिम्पी ये तुम्हारे दिल्ली वाले मौसी मौसा जी है और ये उन का बेटा रवि....

शिट ... व्हाट द फ़क ये है डिम्पी जिसे पूरी रात मैं पटाने की कोशिश कर रहा था वो मेरी कजन है..
पूरी रात की फेंटेसी उतर गयी, डिम्पी का चेहरा भी उतर चूका था.. हम दोनों एक दुसरे से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे... अब मुझे इस शादी से जल्द से जल्द घर निकलना था.. गिल्ट हो रहा था अपनी इस हरकत का...फिर अगले ही पल ध्यान आया कौन सा मैं वन साइडेड कर रहा था वो भी तो लाइन दे रही थी...
पर मुझे लगा कम से कम एक आखिरी बार तो मिल ही लूँ डिम्पी से, वो किनारे खड़ी थी दुल्हन की विदाई हो रही थी मैं उस के बगल में जा कर बोला सॉरी यार मुझे पता नहीं था... अच्छा जी कल रात तो बड़े स्टड बन रहे थे और अब सॉरी... वो बोली...  सॉरी बोल तो रहा हूँ मुझे पता नहीं था और तुम भी तो लाइन दे रही थी... वो मुस्कुराने लगी और उस ने भी कहा सॉरी .... भैय्या....

दर्जनों चप्पलों से सूत दिया हो मुझे ऐसा फील आ रहा था उस के भैय्या कहने से ... अब रुकने की हिम्मत नहीं बची बाय कहा उसे ..तब तक दुल्हन भी विदा हो चुकी थी घर भी खाली हो रहा था मैंने भी अपना सामान कार में रखा मम्मी पापा चलती कार से उन मौसी मौसा और डिम्पी को बाय कर रहे थे पर मुझ में तो पीछे पलटने के बाय करने हिम्मत भी नहीं बची थी...   

5 comments:

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