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राखी वाली चिट्ठी और बराबरी की तैयारी

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प्यारी बहिन
हाँ तुझे बार बार सताने वाला और सिर्फ पीछे से तेरा ध्यान रखने वाला भाई तुझे आज सीधे ख़त लिख रहा है | मुझे कई बार लगता था कि ये बातें मैं तुझ से कहूँ ज़िन्दगी के अलग अलग वक़्त पर पर मैं कभी कह नहीं पाया इस लिए आज तुझे बहुत कुछ कह रहा हूँ | मैंने तुझे बहुत बार छोटी छोटी बातों पर सब का साथ न मिलने पर हारते हुए देखा है | बहुत बार चीजें हमारे नज़रिए में सही होती है पर सामने वाला का नजरिया वो सब नहीं देख पाता | अगर तुम्हें लगता है कि तुम सही हो या फिर तुम ख्वाइश रखती हो सही होने की तो भिड़ जाओ, किसी और के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए घर वालों से, जमाने से किसी से भी क्यूंकि जिस दिन तुम खुद को सही साबित कर दोगी उस दिन सारी दुनिया तुम्हारी मुट्ठी में होगी | इस दौरान अगर तुम हार के ठोकर खा भी गयी तब भी ये याद रखो कि तुम मजबूत हो के दो कदम आगे ही बढ़ी हो पीछे नहीं गिरी | हार के सवालों से डरो नहीं उस का भी सामना करो |
दुनिया कहती है नारी सहनशीलता की मूर्ति होती है , उन दुनिया वालों के इस विचार को किनारे डाल दो क्यूंकि तुम्हे अपनी ज़िन्दगी खुद गढ़नी है तुम्हारे परिवार वाले,तुम्हारे दोस्त,तुम्हारे…

रुको ...क्या किसी को हराना इतना जरुरी है ?

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डियर ज़िन्दगी कैसे हो ?
होप तुम अच्छी ही होगी , आज तुम्हे ख़त लिखने को मन तो नहीं था पर कुछ मौका बन गया | अब तुम सोचोगे कि मौका कैसा ? तो मौका ये थी कि अपनी ज़िन्दगी की गुफ्तगू करने के लिए जो चंद नंबर मेरे पास थे उन्हें जब फोन लगाया तो कई नंबर उठे नहीं , कई नंबर कहीं और गुफ्तगू में व्यस्त थे | तो तब मुझे लगा की छोड़ो यार दूसरों को खुद अपनी ज़िन्दगी से ही बातचीत कर ली जाए |
ज़िन्दगी पता तुम्हें मेरे आसपास के लोग सब भाग रहे हैं , तेज बहुत तेज और भी तेज | पर हर शाम या कहें कि कुछ एक शाम बाद जब उन्हें कहीं पहुँचते नहीं देखता तो मन दुखी होता है | हम सब या तो फिर अपने गुजरे पल का रोना रो रहे होते हैं या फिर अपने आने वाले पल के लिए समेट रहे होते हैं बस इस पल में कोई नहीं रहना चाहता | पिछले साल जब मैं राजस्थान के अम्बेर फोर्ट में लाइट एंड साउंड शो देख रहा था तो मैंने जब बीच में एक बार नज़र उठा कर पीछे देखा तो 80% लोग अपने कैमरे से उस नज़ारे को कैद करने में जुटे पड़े थे | कोई उस वक़्त को अपने आँखों में कैद नहीं कर रहा था , यही तो करते हैं हम |
बोर्ड एग्जाम कुछ जगह ख़त्म हो गये कुछ जगह बाकी हैं | उस के ब…

अस्तित्व की सामाजिक लड़ाई है "विधवा "

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ये बात कहने का ख्याल मेरे दिमाग में पहली बार तब आया था जब 2013 में मैंने एक 21 साल की लड़की को देखा जिस ने तीन महीने पहले ही केदारनाथ आपदा में अपना पति खोया था |जो एक सरकारी कार्यक्रम में मुआवजे का चेक लेने देहरादून आई थी और भीड़ में सबसे पीछे बैठ कर अपने पर्स से निकाल कर बिंदी लगा रही थी | अचानक उसका नाम आगे से पुकारा गया उस का हाथ सबसे पहले उस बिंदी पर गया और उसे हटा के आगे सरकारी चेक लेने आगे गयी | मेरे दिमाग में पहला सवाल यही था कि क्यूँ उस ने वो बिंदी हटाई ? क्यूँ वो उस के साथ आगे स्टेज पर या यूँ कहें समाज के सामने क्यूँ नहीं गयी ? मैं ये सवाल उस से नहीं पूछ पाया क्यूंकि उस कार्यक्रम के बाद मैंने उसे नहीं देखा, सच कहूँ तो मैंने उसे खोजा ही नहीं क्यूंकि ये सवाल पचाने में मुझे काफी वक़्त लगा |
अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दुनिया भर में महिलाओं की उपलब्धियों पर बातचीत हो रही है | हर क्षेत्र में महिलाओं की बढती भागीदारी बढ़ते समाज का एक अच्छा पक्ष हमारे सामने रख रहा है | ऊपर लिखी घटना की छाप मेरे दिमाग में काफी गहरी थी तो मैंने पड़ताल को इस मुद्दे पर केन्द्रित किया | वर्तमान समाज मे…

मेरे सवाल और देशद्रोह

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मैंने पूछा कि ये सड़क क्यूँ सालों से नहीं बन रही ?
उस ने कहा चुप रहो, वहां सीमा पे जवान मर रहे हैं और तुम्हें सड़क की पड़ी है |
मैं चुप हो गया ||

मैंने पूछा लाखों बच्चे स्कूल क्यूँ नहीं जा पा रहे ?
उस ने कहा चुप रहो वहां सीमा पे जवान मर रहे हैं और तुम्हे बच्चों के स्कूल की पड़ी है |
मैं चुप हो गया ||

मैंने पूछा लाखों युवा बेरोजगार क्यूँ हैं ?
उस ने कहा देशद्रोही कहीं के चुप हो जाओ, वहां सीमा पे जवान मर रहे हैं और तुम्हें युवाओं की पड़ी है |
मैं चुप हो गया ||

मैंने पूछा माजरा क्या है कि अपने ही देश में हम सुरक्षित नहीं हैं ?
उस ने कहा कि खामोश ,वहां सीमा पे जवान मर रहे और तुम्हें खुद की सुरक्षा की पड़ी है |
मैं चुप हो गया ||

मैंने जानना चाहा कि देश में इतना भ्रष्टाचार क्यूँ है ?
उस ने कहा तू राष्ट्रद्रोही है ,वहां सीमा पे जवान मर रहे और तुम्हें भ्रष्टाचार की पड़ी है |
और मैं इस बार भी चुप हो गया |

मैंने कहा इतने बड़े बजट के बाद भी सीमा पे जवानों को सही खाना क्यूँ नहीं मिल रहा ?
उस ने कहा चुप हो जा वहां सीमा पे जवान मर रहे हैं और तुझे उन के खाने की पड़ी है ?
मैंने कहा भाई मेरा सवाल भी तो वही है कि क…

प्यार की पाती || लव मैरेज अरेंज मैरिज और कुछ उखाड़ना

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Hey #UNKNOWN
हाँ क्यूंकि अभी तुम्हारा अता पता दोनों ही लापता है | सुनो 2017 का Happy Valentine day  , अरे घबराओ नहीं तुम जिस साल भी मुझ से मिलो तो मैं तुम्हे अपनी ज़िन्दगी के पहले साल से लेकर उस साल जिस साल तुम मुझे मिलोगी तब तक के सारे वैलेंटाइन डे विश कर दूंगा और सिर्फ वैलेंटाइन डे ही क्यूँ हम तो पूरे साल इश्क का त्यौहार मनाएंगे |
मैं पिछले हफ्ते कुछ यूथ से बात कर रहा था . मुद्दे की बात पर लाने के लिए मैं अक्सर मुद्दे से अच्छी तरह से भटका के बात शुरू करता हूँ तो फिर टॉपिक पर लाना आसान रहता हैं | एक ने मुझ से पूछा सर अरेंज मैरिज और लव मैरेज में क्या फर्क है ? मैंने कहा यार एक उम्र तक स्कूल में कॉलेज में हम बहुत ट्राय करते हैं | कुछ से पट जाती है और लम्बी पटती है और फाइनली दोनों शादी कर लेते हैं तो उसे लव मैरिज कहते हैं, हाँ लव के मैरिज तक पहुँचने के बीच काफी अलग अलग तरह के मैलो ड्रामा भी होते हैं पर उन ड्रामों का किरदार बनने के बाद जब नाटक ख़त्म होता है तो विजेता ट्रॉफी यानि तुम्हारी लवर तुम्हारी धर्म पत्नी तुम्हारे पास होती है |
तो सर फिर अरेंज मैरिज क्या है ? एक ने बड़ी मासूमियत से पू…

ज़िन्दगी के नाम ख़त || पाना खोना और खोना पाना दोनों के मतलब

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डियर ज़िन्दगी..
पता नहीं कभी तुम्हे किसी ने ख़त लिखा या नहीं , पर आज मेरा मन हुआ तुमसे बतियाने का | सोचा तो नहीं कि किस स्पेशल टॉपिक पर तुमसे बात करूँ ....

मैं ऊँचे पहाड़ों के बीच रहता हूँ ,यहाँ नदियाँ हैं, झरने हैं, बर्फ से ढकी वादियाँ हैं , पहाड़ के सीधे लोग हैं और हर पहाड़ की चोटी पर किसी न किसी भगवान् का मंदिर है | कहते हैं पहाड़ों पर बच के रहना चाहिए, कभी ऊँची आवाज़ में गाना नहीं चाहिए कभी बांसुरी नहीं बजाना चाहिए कभी जोर से गुनगुनाना नहीं चाहिए क्यूंकि पहाड़ों में आछरियाँ(परियां) रहती हैं | उन्हें ये सब चीजें पसंद हैं तो जो भी ये सब करता है उसे हर (अपहरण) कर के ले जाती हैं |

मेरा भी मन करता है कभी कभी कि मिलूं उन आछरियों से बात करूँ उन से, कुछ एक बालगीत सुनाऊँ उन्हें ...पता नहीं उन्हें बालगीत पसंद आयेंगे या नहीं हा हा हा ... सूरज के देश में चंदा के गाँव में .... या फिर ... सूरज गोल चंदा गोल... या कोई कहानी सुना दूंगा उन्हें अपनी लिखी कोई... मैं बादलों में उड़ना चाहता हूँ उन के साथ... ऊँचे से ऊँचे पहाड़ों को छूना चाहता हूँ उन के साथ... और मन हुआ तो फिर लौट आऊंगा फिर अपनी इस ज़िन्दगी में वापस .…

क्या हम वाकई सुरक्षित हैं न्याय के दरवाज़े तक पहुँचने के लिए ? :: प्रधान न्यायाधीश के नाम ख़त

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माननीय  प्रधान न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय भारत पहला ख़त आप को लिख रहा हूँ और बहुत मजबूर हो कर लिख रहा हूँ | मैं रिसर्च प्रोग्राम का  हिस्सा बन के भारत के गांवों को करीब से देख रहा हूँ, समझ रहा हूँ | भारत के विकास के लिए चल रही योजनाओं को करीब से जान रहा हूँ कि कैसे योजनायें बनती है कैसे जमीन पर पहुँचती हैं और उस के फेल पास होने के क्या क्या कारण होते हैं ? इस दौरान मेरे पास कुछ एक सरकारी स्कूल भी हैं जहाँ के बच्चों को मैं पढ़ता भी हूँ और हर सरकारी कार्यक्रम चाहते न चाहते हुए भी जोर शोर से मनाता हूँ | ये कार्यक्रम मैं सिर्फ इस लिए नहीं मनाता क्यूँकी ये सरकारी आदेश होते हैं बल्कि इन कार्यक्रमों का अच्छा पक्ष बच्चों को समझाता हूँ | आज मुझ से एक छोटे से बच्चे ने सवाल किया कि गुरूजी कल कुछ लोगों को कोर्ट में वकीलों ने मारा किसी ने उन्हें क्यों नहीं रोका ?

मेरे पास जितना जवाब था मैंने उसे दिया पर उस के बाद मेरे मन में आप से पूछने के लिए कई सवाल खड़े हो गये | क्या न्याय पाने की एक मात्र जगह भी सुरक्षित नहीं है ? हम पुलिस पर विश्वास नहीं करते मिडिया पर विश्वास नहीं करते ,सरकार पर विश्वास नहीं करत…