Monday, February 05, 2018

हमारा प्यार और तवा फुल्का रोटी


आई लाइक योर स्किन कलर ... मैंने उस के कंधे पर एक किस करते हुए कहा

 ओहो... कितने रेसिस्ट हो तुम ... उस ने हल्की सी मेरे गाल में चपत लगा कर बोला ..


अरे इस में रेसिस्ज्म कहाँ से आ गया ? आई लव यू.. मोर देन ऐनी वन इन दिस वर्ल्ड .. बट फिर भी आई लाइक योर स्किन कलर... मैंने अपने गाल को सहलाते हुए जवाब दिया ...

हे भगवान क्या हो गया रवि तुम्हें ? तुम कबसे इंसान को रंगों में बाँटने लगे ? अब हमारे हाथ में थोडा न है कि कौन सा रंग ले कर हम पैदा होंगे ? उस ने सवाल पर सवाल दागे

हम्म ... मैंने उस के सारे सवालों को इग्नोर कर के उस के वार को खाली कर दिया...

तुम्हें वैलेंटाइन डे पे कौन सा गुलाब चाहिए ?

लाल गुलाब ....

हे भगवान् कितनी रेसिस्ट हो तुम .... लाल गुलाब ही क्यूँ ? काला, सफ़ेद या पीला गुलाब क्यूँ नहीं ? मैंने टांग खींचते हुए कहा ...
अरे यार मैंने उन्हें कहाँ इग्नोर किया बस उस दिन मुझे तुम लाल गुलाब दोगे तो मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा ... उसने हल्का नाराज़ हो कर कहा ...

बस तुम सही पकड़ी ... तुम्हारा रंग एक तवा फुल्का रोटी जैसा है और न केवल रंग तुम हो भी वैसे ही ....

वाह वाह... लोगों के पति उन्हें चाँद तारों और न जाने किस किस चीज से कम्पेयर करते हैं और तुम मुझे तवा रोटी बोल रहे हो ??
तवा रोटी नहीं तवा फुल्का रोटी.... मैंने उसे करेक्ट करते हुए कहा ...
हे भगवान् क्या कहूँ मैं....

अरे यार नाराज़ क्यूँ होती है कभी रोटी को देखा है ? वो आटे पानी को सही अंदाज़ और वक़्त तक गुथने और फिर उसे सही आकार में गोल करने और सही टाइम तक पकाने के बाद ही बनती है...

अच्छा जी ? तो बताओ कैसे हुई मैं तुम्हारी तवा फुल्का रोटी ? उस ने चाय का एक कप मुझे दे कर  और अपनी कॉफी के कप पर सवा 2 चम्मच चीनी डालते हुए पूछा .... ( रिया को चाय पसंद नहीं थी और अपनी कॉफी में फिक्स सवा 2 चम्मच चीनी से ही उसकी परफेक्ट कॉफी बनती थी )

यार तुम्हें भी पता है कि हम दोनों की शादी से काफी लोग खुश नहीं थे जिसमें हम दोनों के ही घर वाले थे , बहुत कुछ कहा भी तुम्हें उन्हें पर तुमने सब कुछ भुला कर सबको इतने कम वक़्त पर एक माला में पिरो दिया वही सबसे बड़ी बात है और तुमने सभी चीजें सही मात्रा में सही वक़्त पे की... थैंक्स यार.... मैंने चाय के दो तीन सिप लेते हुए अपनी  पूरी बात कह दी ...

रिया ने बड़ी शांति से बात को सुना और खामोश हो गयी... उस की ये ख़ामोशी मेरे अन्दर हलचल पैदा कर गयी ... मैंने उसे पूछा क्या हुआ ? सॉरी मेरी किसी बात का तुम्हें बुरा लग गया हो तो...
उस ने कॉफी ख़त्म कर के मेरे पास आ कर मेरे माथे को चूम कर कहा...


तुम्हें पता है रवि कोई भी अच्छा वाला ताला सिर्फ अपनी ही चाबी से खुलता है और ताले और चाबी के बीच की सही सामंजस्य ही ताले को हर किसी चाबी से खुलने से बचाता है हम दोनों के बीच भी यही बातें है सिर्फ मैंने ही सब कुछ नहीं सम्हाला तुमने भी मेरे घर वालों के लिए बहुत कुछ किया और हर बार सही वक़्त पे किया , तो सिर्फ मैंने ही तुम्हारी रोटी को पूरा नहीं किया बल्कि उस रोटी को बनने में तुमने भी पूरा साथ दिया ... हा हा हा और तुम्हारी भाषा में तुम भी मेरे तवा फुल्का रोटी हो ...              
और दोनों ही हम एक दूसरे को तवा फुल्का रोटी कह के रेसिस्ट हो गये...


Saturday, January 06, 2018

बिना नाम के रिश्ते की आज़ादी


चाय की चुस्कियों के साथ मैंने उस से सवालिया हिसाब से कहा सुनो...
हाँ बोलो ... उस ने भी अपने लबों से चाय के कप को हटा कर कहा
मैंने महसूस किया है कि तुम ये जाहिर नहीं होने देती कि हम दोनों आपस में जानते हैं एक दूजे को ...मैंने चाय की दूसरी चुस्की लेते हुए पूछा ...
हाँ तो ... क्या जरुरी है सब को बताना ? उस ने सवाल किया
क्यूँ जरुरी नहीं है सब को बताना ? मैंने सवाल का जवाब सवाल में दिया
बताओ तो क्यूँ जरुरी है सब को बताना ? और हो क्या जायेगा ये बताने से ? उस ने शांत तरीके से चाय की चुस्कियों के साथ सवाल दागा ...
अरे यार क्या बात कर रही हो ? बताओ तो क्या हो जायेगा सब कुछ छिपाने से ? मैंने सवाल पे फिर सवाल किया
अच्छा तो सुनो .... तुम्हारा दायरा बहुत बड़ा है ...तुम मानो न मानो पर तुम्हें जानने वाले काफी है ....और मैं तुम्हारे साथ जुड़ कर ....चाहे रिश्ता हमारा जो कुछ भी हो...या न भी हो... इसे लोगों के मुहँ में पान की तरह नहीं परोसना चाहती ... मैं नहीं चाहती कि लोग इसे किस्से कहानियों में बदल दें... क्यूंकि मुझे पता है कि तुम तो कल नई कहानी का किरदार बन जाओगे पर मुझे जूझना पड़ेगा इन्हीं बासी हो चुकी कहानियों संग...
तुम्हें भरोसा नहीं है मुझ पर ? क्या मैं हमारी दोस्ती को यूँ छोड़ के चला जाऊंगा ?? मैंने पूछा
भरोसा मुझे खुद से ज्यादा तुम पर है पर डर मुझे उन लोगों का ज्यादा है जो घूमते हैं हमारे आसपास ...क्यूंकि मैं सच में क्लास की कोने वाली सीट पर बैठने वाली बच्ची रही हूँ जिसे अधिकतर लोग ध्यान नहीं देते और मैं खुश हूँ उस में ही...मैं आगे की सीट पर आ कर भीड़ का सामना नहीं करना चाहती.... मैं सवाल जवाब के दायरों से दूर अपनी ज़िन्दगी बसाना चाहती हूँ....और ये तुम्हारे साथ बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है ...मैं तुम्हारी कहानियों संग कैद नहीं होना चाहती ..
क्या मैं सब कुछ छोड़ दूँ ? मैंने उस को प्यार से गले लगा कर पूछा ...
नहीं...बिल्कुल नहीं... तुम मेरी वजह से बदल जाओ..इस का बोझ नहीं सह पाऊँगी... जो है जैसा है...जहाँ तक है..बस चलने दो इसे... न कोई नाम दो... न कुछ चाहो इस से..ना कुछ खोवो इस के लिए...बस इसे यूँ ही रखने दो..यूँ ही... .. उस ने मुझ पर अपनी जकडन को और मजबूत करते हुए कहा....
ये सवाल जवाब का दौर ख़त्म हो चुका था... न जाने कौन आज़ाद हुआ और कौन कैद हो गया ..

Thursday, September 07, 2017

भीड़ का हिस्सा बनके तुम अपनी मौत के लिए खुद जिम्मेदार होंगे !!!

पहले वो मेरे शहर में आये, लोगों को मारने लगे, 
मैंने कुछ नहीं किया ...

फिर वो मेरे मोहल्ले में आये,
मैंने कान बंद कर लिए...

फिर वो मेरी गली में आये,
मैंने आखे बंद कर ली...

जब वो मेरे घर में आये,
तो मुझे बचाने वाला कोई नहीं था !



द्वितीय विश्वयुद्ध की इस कविता से मैं तब रूबरू हुआ था जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन चल रहा था | इस कविता में कही बातें समाज का वो आईना है जिस पर पर्दा डाल कर हम उससे किनारा तो कर सकते हैं पर वो पर्दा कभी न कभी आईने से हटेगा और जब तक हम उस सच को समझें तब तक शायद बहुत देर हो जाए |

    गौरी लंकेश की हत्या एक अलार्म है | ये अलार्म पहले भी बजते आये हैं कभी राम रहीम केस को सामने लाने वाले रामचंद्र छत्रपति,कभी मलेशप्पा कलबुर्गी और कभी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या से पर हम ध्यान नहीं देते क्यूंकि ये मुद्दे नहीं हैं |     
    
 इस बार अलार्म ज्यादा खतरनाक है | इस बात से नहीं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ख़त्म हो रही है बल्कि इस बात की कि हमारा समाज बड़ी तेजी से वैचारिक शून्य भीड़ में बदलता जा रहा है | हम क्यूँ अपने मुद्दों के लिए नहीं सवाल करते ? कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर गोवाहटी तक हम लाखों मुद्दों से जूझ रहे हैं पर एक तंत्रगत ब्यवस्था के तहत हमें सोचने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि हमारा धर्म खतरे में हैं और ये सब मुद्दे गौण हैं अभी हमें धर्म बचाना है |
    
किसान खेती छोड़ रह है , हमारी शिक्षा ब्यवस्था दुनिया में कोई स्थान नहीं रखती , देश के अन्दर गरीब आदिवासियों को गोलियों से भूना जा रहा है , बात बात पर गलियों में भीड़ उग्र हो कर किसी न किसी को मौत के घाट उतार रहे है , पर हम इन सब बातों को बहस के केंद्र में नहीं लाना चाहते |

       कौन है वो लोग जो इतनी उग्रता समाज में फैला रहे हैं ? कौन है वो लोग जो हर मौत को जस्टिफाई कर रहे हैं ? कौन हैं वो लोग जो समाज की सच्चाई सामने लाने पर गोलियों से भून रहे हैं ? कौन हैं वो लोग वो भारत माता की जय के नारे लगा कर औरतों को रंडी ,वैश्या,छिनाल लिख रहे हैं ?

        फेसबुक ,ट्विटर पर इतना लम्बा लम्बा कंटेंट कहाँ से आ रहा है ? कोई तो लिख रहा होगा और संस्थागत तरीके से लिख रहा होगा | घटना के बाद घंटे भर में कैसे फेसबुक और ट्विटर का नीलापन जज्बातों के उमाड़ से बहने लगता है ? अगर वो कंटेंट मैं और आप अपने नाम से नहीं लिख रहे तो वो गुमनाम कौन लेखक है जो इतना जहर अपने हलक से उगल रहा है और हम धडाधड उसे शेयर कर रहे हैं |
      
दोषी कौन है ? केंद्र सरकार या राज्य सरकार या हम खुद ? क्या हम जो सोशल मिडिया पर फैला रहे हैं क्या हम वही बातें अपने परिवार के साथ साझा कर सकते हैं ? अगर किसी लड़की को हम रंडी या वैश्या कह रहे हैं तो क्या हम यही शब्द अपनी माँ,बहन या बेटी के लिए सुन सकते हैं ? अगर नहीं तो हम दोगला ब्यवहार कर रहे हैं समाज में |
       
सरकारों को चुनने में समझदारी दिखाओ | क्यूंकि आज जो खुद को स्थापित करने के लिए साम दाम दंड भेद का सहारा ले सकते हैं उन्हें कल जरूरत पड़ने पर तुम्हें भीड़ से कुचलवाने में वक़्त नहीं लगेगा | 

      विचारों को मत मरने दो , उन्हें स्थापित करो ,सवाल करो, सवालों को ख़त्म मत करो , सवाल पूछने वालों को ख़त्म मत करो | भीड़ का हिस्सा मत बनो क्यूंकि आज तुम भीड़ से अलग होकर अपनी बात नहीं कही तो कल तुम्हारी कहानी सुनने वाला कोई नहीं होगा |  आज गौरी लंकेश थी कल तुम होंगे और तुम ये भी नहीं कह पाओगे कि मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्यूंकि वो इसी लिए हो रहा होगा क्यूंकि तुमने कभी कुछ नहीं कहा |     

        



Sunday, August 06, 2017

राखी वाली चिट्ठी और बराबरी की तैयारी

प्यारी बहिन
हाँ तुझे बार बार सताने वाला और सिर्फ पीछे से तेरा ध्यान रखने वाला भाई तुझे आज सीधे ख़त लिख रहा है | मुझे कई बार लगता था कि ये बातें मैं तुझ से कहूँ ज़िन्दगी के अलग अलग वक़्त पर पर मैं कभी कह नहीं पाया इस लिए आज तुझे बहुत कुछ कह रहा हूँ |
मैंने तुझे बहुत बार छोटी छोटी बातों पर सब का साथ न मिलने पर हारते हुए देखा है | बहुत बार चीजें हमारे नज़रिए में सही होती है पर सामने वाला का नजरिया वो सब नहीं देख पाता | अगर तुम्हें लगता है कि तुम सही हो या फिर तुम ख्वाइश रखती हो सही होने की तो भिड़ जाओ, किसी और के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए घर वालों से, जमाने से किसी से भी क्यूंकि जिस दिन तुम खुद को सही साबित कर दोगी उस दिन सारी दुनिया तुम्हारी मुट्ठी में होगी | इस दौरान अगर तुम हार के ठोकर खा भी गयी तब भी ये याद रखो कि तुम मजबूत हो के दो कदम आगे ही बढ़ी हो पीछे नहीं गिरी | हार के सवालों से डरो नहीं उस का भी सामना करो |

दुनिया कहती है नारी सहनशीलता की मूर्ति होती है , उन दुनिया वालों के इस विचार को किनारे डाल दो क्यूंकि तुम्हे अपनी ज़िन्दगी खुद गढ़नी है तुम्हारे परिवार वाले,तुम्हारे दोस्त,तुम्हारे ऑफिस वाले तुम्हें इस में मदद करेंगे पर तुम्हें खुद ही खुद को बनाना होगा | दुनिया को अपने चश्में से देखो ,सीखो नया कुछ रोजाना | खुद को कुछ चीजों तक में ही न समेट दो | अगर बाहर की तुम्हें अच्छी समझ हो तो घर की भी समझ तुम्हें उतनी ही होनी चाहिए | अगर तुम दुनिया के सामने प्रेजेंटेशन दे रही हो तो पाँव में मोच आने पर सरसों के तेल में लहसन गर्म करके मालिस करने पर दर्द कम होता है के ज्ञान की पोटली भी तुम्हारे पास होनी चाहिए |
तुम्हें मुझ से ज्यादा अच्छे से पता है कि जिस समाज में हम रहते हैं वहाँ महिला और पुरुष की बराबरी की बातें कम ही होती है | एक नजरिया यह है कि इस बात पे हंगामा करो कि मैं ये नहीं करुँगी , समाज हाय हाय, दूसरा तरीका ये हो सकता है कि मैं बदलाव की शुरुवात अपने घर से करूँ और पहले उन लोगों को बदलू जो मेरे अपने है | तुम पापा से कपड़े धुलने को कह सकती हो , मुझ से झाड़ू मारने को या कल के दिन जब तुम्हारी शादी हो जाए तो अपने पति को प्यार से बराबरी की बातें समझा सकती हो ,बराबरी में काम करना सिखा सकती हो ताकि कल अगर तुम्हारें बच्चे हों तो उनका जन्म उस घर में हो जहाँ सब बराबरी पर बिस्वास करतें हो | ये तरीका जरा लम्बा जरुर है पर पीढियां सुधारने वाला है |
रिश्ते हमारी ज़िन्दगी में वही काम करतें हैं जैसे साईकिल के पहिये के लिए बॉल बेयरिंग | हमें उस पर कभी कभी ग्रीस या तेल भी डालना पड़ता है जिससे साईकिल का पहिया अच्छे से चलता रहे | ज़िन्दगी के पहिये को बराबर घुमाने के लिए हमें रिश्तों को इज्ज़त और वक़्त का ग्रीस देना पड़ता है ताकि वो अच्छे से चल सकें | अगर तुम्हें कभी लगे कि ये रिश्ते तुम्हारी ज़िन्दगी में बड़ी रुकावट बन रहे हैं जो कि वक़्त और इज्ज़त की ग्रीस डालने से भी नहीं ठीक हो रहे तो खुद को उन रिश्तों से किनारे करने में ही भलाई है | किसी रिश्ते को इस कड़वाहट पर कभी मत छोड़ देना कि तुम्हें उन रिश्तों से नज़रें चुरानी पड़ें |       
   ज़िन्दगी में बड़े सपने देखो ,उन्हें हासिल करने की कोशिश करो जीतो,हारो,सीखो,घूमों क्यूंकि तुम्हें केवल तुम ही गढ़ सकती हो बाकी कोई और नहीं.
इस रक्षा बंधन मुझ से नहीं खुद से ये वचन लो कि तुम चाहे ज़िन्दगी की कोई भी मुश्किल हो ज़िन्दगी जीनें का फलसफा कभी नहीं खोओगी | क्यूंकि इस दुनिया में तुम्हारे लिए कोई सबसे इम्पोर्टेन्ट है तो वो सिर्फ तुम हो अपना ख़याल रखना |
तुम्हारा भाई
बिमल    

    

Thursday, April 06, 2017

रुको ...क्या किसी को हराना इतना जरुरी है ?

डियर ज़िन्दगी कैसे हो ?
होप तुम अच्छी ही होगी , आज तुम्हे ख़त लिखने को मन तो नहीं था पर कुछ मौका बन गया | अब तुम सोचोगे कि मौका कैसा ? तो मौका ये थी कि अपनी ज़िन्दगी की गुफ्तगू करने के लिए जो चंद नंबर मेरे पास थे उन्हें जब फोन लगाया तो कई नंबर उठे नहीं , कई नंबर कहीं और गुफ्तगू में व्यस्त थे | तो तब मुझे लगा की छोड़ो यार दूसरों को खुद अपनी ज़िन्दगी से ही बातचीत कर ली जाए |

ज़िन्दगी पता तुम्हें मेरे आसपास के लोग सब भाग रहे हैं , तेज बहुत तेज और भी तेज | पर हर शाम या कहें कि कुछ एक शाम बाद जब उन्हें कहीं पहुँचते नहीं देखता तो मन दुखी होता है | हम सब या तो फिर अपने गुजरे पल का रोना रो रहे होते हैं या फिर अपने आने वाले पल के लिए समेट रहे होते हैं बस इस पल में कोई नहीं रहना चाहता | पिछले साल जब मैं राजस्थान के अम्बेर फोर्ट में लाइट एंड साउंड शो देख रहा था तो मैंने जब बीच में एक बार नज़र उठा कर पीछे देखा तो 80% लोग अपने कैमरे से उस नज़ारे को कैद करने में जुटे पड़े थे | कोई उस वक़्त को अपने आँखों में कैद नहीं कर रहा था , यही तो करते हैं हम |

बोर्ड एग्जाम कुछ जगह ख़त्म हो गये कुछ जगह बाकी हैं | उस के बाद रिजल्ट आएगा और उस के बाद होगा अच्छे कॉलेज में एडमिशन वाला हाई प्रोफाइल ड्रामा | इस के अलावा एंट्रेंस टेस्ट जैसे नीट और आई.आई.टी जी के रिजल्ट भी आयेगें | मेरे लिए सब से ज्यादा कठिन महीने होते हैं मई से लेकर अगस्त तक, क्यूंकि इस में हमारे देश में सुसाइड रेट बहुत बढ़ जाता है | मुझे बहुत बुरा लगता है इस फैक्ट को जब भी मैं बार बार सुनता हूँ कि हमारा देश यूथ सुसाइड में नंबर 1 पर है | किसे दोष दें इन आत्महत्याओं का ? बच्चों को , उन के माँ बाप को या सोसाइटी को ? क्यूँ हम कभी ये नहीं समझ पाते कि किसी भी बड़े कॉलेज में पहुँच जाना ज़िन्दगी का आखिरी लक्ष्य नहीं हो सकता | ज्ञान और अच्छे मार्क्स के बीच में कोई संबंध नहीं है अच्छे मार्क्स लाना एक अच्छी प्लानिंग का नतीजा है न कि अच्छी पढाई का | दुनिया बदलने के लिए अगर अच्छे मार्क्स लाना ही जरुरी होता तो कहाँ हैं सालों साल की मेरिट लिस्ट वाले वो बच्चे ? क्यों गायब हो जाते हैं सिर्फ एक बार स्टार बनने के बाद वो ? मैं अच्छे मार्क्स का विरोध नहीं करता पर मुझे लगता है कि सिर्फ अच्छे मार्क्स लाना ज़िन्दगी की सफलता का सक्सेस मंत्र नहीं है |

मेरा भाई डॉ. है क्यूंकि वो ये चाहता है , मैं डॉ. नहीं हूँ क्यूंकि मैं ये नहीं चाहता | मुझे मजा आता है दुनिया घूमने में, नए नए लोगों से मिलने में, नई नई कहानियां लिखने में, दुनिया भर के युवाओं से मिलने में और मैं इस बात पर बहुत खुश हूँ | कुछ एक दिन पहले मेरी चचेरी छोटी बहिन ने मुझ से एक बात कही, उस ने कहा कि भैय्या मैं जब पूरे परिवार के सामने बड़े भैय्या की रिस्पेक्ट होते देखती हूँ तो मुझे आप के लिए बुरा लगता है , आप को बाहर वाले तो इतना रिस्पेक्ट देते हैं पर परिवार वाले नहीं समझ पाते | मैं चाहती हूँ कि आप इतने बड़े आदमी बन जाओ की आप बड़े भैय्या को हरा दो | उस के सवाल पर मैं उस के मन को पढ़ पा रहा था कि कैसे सोसाइटी का इफ़ेक्ट उस के दिमाग में ये असर पैदा कर रहा है कि वो दो भाइयों को उन के प्यार नहीं बल्कि उन के ओहदे की नज़र से देखे | मैंने उस का जवाब दिया कि ये मेरी ज़िन्दगी है और मैं किसी को हराने या किसी को कुछ दिखाने के लिए नहीं कर रहा हूँ | जो मैं कर रहा हूँ उसे मैंने चुना है और ये मेरी सच्चाई है कोई उस पर क्या सोचता है ये मेरी दिक्कत नहीं है | मैं भाई को कैसे हरा सकता हूँ जब कि हमारे रास्ते ही बिल्कुल अलग अलग हैं, और किसी को हराना ही क्यूँ है ? जब कभी लगे कि तुम भीड़ के साथ साथ भाग रहे हो या तुम्हें किसी को हराना है वो रुक जाओ वहीँ पे सोचो इस बात पे कि क्या किसी को हराना इतना जरुरी है ? अपनी ज़िन्दगी जियो और खुश हो के जियो | सुना होगा न जियो और जीने दो |  
ये ज़िन्दगी मेरी अपनी है,सब की ज़िन्दगी में उतार चढाव चलते रहते हैं और ये उतार चढ़ाव बताते हैं कि हम जिंदा है बस हौसला नहीं खोना है हमें | कोई इंसान या सोसाइटी इतनी ताकतवर नहीं हो सकती कि उस के एक सवाल या आरोप से मेरा पिछला अनुभव सारा धरा का धरा रह जाए | बात करो दुनिया भर में बहुत लोग हैं उस से अलग अलग मुद्दों पर बात करो | उन्हें समझो कैसे उन्होंने खुद और अपने ज्ञान को खड़ा किया है |दूसरे के ज्ञान से घबराओ नहीं , अपनी समझ पैदा करो | खुद के लिए लक्ष्य रखो ,खुद को हराओ तब देखो कि ज़िन्दगी में कैसा नयापन आता है |
बात करो अगर परेशान हो तो , क्यूंकि बात करना बहुत जरुरी है , कहानी लिखो ,कविता लिखो ,फेसबुक पर लिखो,ऑडियो रिकॉर्ड करो , ब्लॉग लिखो कुछ भी हो खुद को जाहिर करो हर हालत में | बस कभी अकेले मत परेशान हो |
आज के लिए बहुत बात हो गयी तुझ से मिलतें हैं फिर जल्दी नए किस्सों के साथ
तुम्हारा
जज्बात ए बिमल