ज़िन्दगी के नाम ख़त || पाना खोना और खोना पाना दोनों के मतलब

डियर ज़िन्दगी..
पता नहीं कभी तुम्हे किसी ने ख़त लिखा या नहीं , पर आज मेरा मन हुआ तुमसे बतियाने का | सोचा तो नहीं कि किस स्पेशल टॉपिक पर तुमसे बात करूँ ....

मैं ऊँचे पहाड़ों के बीच रहता हूँ ,यहाँ नदियाँ हैं, झरने हैं, बर्फ से ढकी वादियाँ हैं , पहाड़ के सीधे लोग हैं और हर पहाड़ की चोटी पर किसी न किसी भगवान् का मंदिर है | कहते हैं पहाड़ों पर बच के रहना चाहिए, कभी ऊँची आवाज़ में गाना नहीं चाहिए कभी बांसुरी नहीं बजाना चाहिए कभी जोर से गुनगुनाना नहीं चाहिए क्यूंकि पहाड़ों में आछरियाँ(परियां) रहती हैं | उन्हें ये सब चीजें पसंद हैं तो जो भी ये सब करता है उसे हर (अपहरण) कर के ले जाती हैं |

मेरा भी मन करता है कभी कभी कि मिलूं उन आछरियों से बात करूँ उन से, कुछ एक बालगीत सुनाऊँ उन्हें ...पता नहीं उन्हें बालगीत पसंद आयेंगे या नहीं हा हा हा ... सूरज के देश में चंदा के गाँव में .... या फिर ... सूरज गोल चंदा गोल... या कोई कहानी सुना दूंगा उन्हें अपनी लिखी कोई... मैं बादलों में उड़ना चाहता हूँ उन के साथ... ऊँचे से ऊँचे पहाड़ों को छूना चाहता हूँ उन के साथ... और मन हुआ तो फिर लौट आऊंगा फिर अपनी इस ज़िन्दगी में वापस ...और हाँ उन्होंने छोड़ा तो, क्यूंकि सारी कहानियों में हरण करने की कहानियां तो हैं पर लौटने की कहानियां एक भी नहीं....

किसी भी पल को महसूस करना एक अलग एहसास है , मुसाफिर बने रहने के चक्कर में ज़िन्दगी तुम और  दुनियां दोनों ही पीछे छुटती गयी | छोटे बच्चों को जिद्द करते देखा ही होगा तुमने कुछ आंसू गिराए नहीं कि सारी दुनिया चल पड़ती है उन ज़िद्दों को पूरा करने और आंसुओं को साफ़ करने , पता अब वो दिन याद आते हैं क्यूंकि बड़े होक हम जिद्द नहीं कर पाते क्यूंकि अब आंसुओं के सैलाब भी किसी का दिल नहीं पिघला पाते |

ज़िन्दगी बहुत खुबसूरत हो तुम पर तुम्हारी खुबसूरती की कीमत बहुत भारी भरकम है | मकड़ी का जाला हो तुम फंस जाते हैं इसमें सारे | पाना खोना और खोना पाना दोनों के मतलब हिंदी की किताब के हिसाब से तो एक ही हैं पर तेरी हिसाब से बिल्कुल अलग |

मैं अकेला पहाड़ों, नदियों से बातें करता हूँ वो जवाब भी देते हैं वो ज्यादा अच्छे हैं वो धोखा नहीं देते कभी मजाक नहीं उड़ाते कभी , वो सब कुछ सुनते हैं , वो बहुत अच्छे हैं |

ज़िन्दगी वक़्त के पन्ने पलट के मुझे बचपन में पहुंचा दे आज ही जहाँ कीमत है आंसुओं की.... शायद बहुत से रिश्ते ज़िद्दों में ही पा लें हम जो हम ने खो दिए हैं जाने अनजाने पाने,खोने और खोने पाने के चक्कर में...
आज इतना ही कभी और फिर गुफ्तगू करेंगे ...
तुम्हारा
ज़ज्बात ए बिमल 

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