Posts

Showing posts from August, 2012

धूमिल उम्मीदें शहर बसाने की ...

Image
ज़िन्दगी  कीमत क्या हैतेरी? वजन क्या हैतुझेमें? कैसे तुझ पेबिस्वासकरूँ चंद घंटों की बारिश और सब कुछतबाह... सारे घर तबाह... सारे आशियाने तबाह किसी की माँ गायब है तो किसी के पिता किसी के बच्चे की खबर नहीं  किसी के सुहाग का कुछ न पता  सरकारीपैसा..... हा हा हा.... साले सरकारी भडवे... इस तबाही के वक़्त भी अपना हिस्सा मांगतेहैं सड़के,मकान जमीन,खेत खलिहान  सब गायब हैं  सब कुछ बहगये.... मुझे नहीं पता कब दुबारा फिर शहरबसेगा मुझे नहीं पता फिर कब इस चमन में फूल खिलेगा  मुझे तो हंसी आती है कैसे दम्म भरते हैं इस ज़िन्दगी का हम कैसे गुमान करते हैं इस ज़िन्दगी पे हम पर एक झटके में सब गायब बची है तो आज भी कुछ जिंदगियां  और फिर से नया शहर बसने की कुछ धूमिल उम्मीदें ....