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Showing posts from April, 2011

Jajbaato ka khel....

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सब कुछ सह के कुछ न कहना मुझ को अच्छा लगता है ...
उस को पाने का खाव्ब ...एक खाव्ब सा मुझ को लगता है ....
बिखर चूका एक खाव्ब ...जो खाव्ब था उस को पाने का ...
अब तो वो खाव्ब कुछ सच्चा कुछ झूठा मुझ को लगता है ...
जज्बातों का खेल ही सच्चा लगता है .....
इस के साथ ही जीना...और..मरना अच्छा लगता है


dur tak us raah me........

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dur tk us raah me sirf me khada tha....
manzile anjaan na khud ka pta tha...
man k apne biswas se uthaya jo pahla kdam....
dekha mere sath pura hujum khada tha....