Tuesday, January 11, 2011

जज्बात-ए-बिमल

मै अकेला उस राह में ...
काफी आगे निकल आया ....
कहने को तो छोड़ दिया था सब कुछ ...
पर अपनों को काफी दुःख दर्द दे आया....
हम चाह कर भी इस दुनिया में अकेले नही हो सकते ....
क्यूंकि पैदा होते ही वो हजारो रिस्तो से जुड़ आया .....
इसे हम अपनी ताकत समझे या लोगों के दिलो का मेल .....
कि एक अनजान रास्ते से भी इक अजनबी मुझे मेरी मंजिल मेरे घर छोड़ आया ......

Saturday, January 08, 2011

Tere khwais....


tera khwais kya h mere aage..........
tere justju kya h mere aage...........
tere tmanna kya h mere aagee.........
sirf ye hi na ki me tera ho jaun?
sirf ye hi na ki me tuj me kho jaun?
sirf ye he na ki me tuj me sma jaun?
intjar kar .............kar intjar us din ka....
jab tak khud khuda na khhe....
"KI BIMAL TUM IS K HO JAO"

talash



kya nhi h mere pass..............
aur kya khass h us k pass.................
rupiya...paisa...dhan aur daulat......
maan...maryada....aiso-aaram....
yash.... sfalta.....kitabi gyan.....
nhi the to muj me man ki santi.....
aur ab h muje sirf ek adad santi ki talash............