मेरे पिता और उनकी किच किच


मेरे पिता किच किच करते थे  ,
मेरे पिता किच किच करते थे ,जब मैं पढता नहीं था  |
जब मैं खाना सही से नहीं खाता था |
जब मैं क्लास में पीछे बैठता था |
जब वो मेरा झूट पकड़ते थे |
जब मैं स्कूल नहीं जाना चाहता था |
जब मैं एक्स्ट्रा पॉकेट मनी मांगता था |
जब मैं डॉ. नहीं बनना चाहता था |
जब मैं उन्हें अपने सपने सुनाता था
एक दिन मैंने अपने पापा से किच किच की उनकी किच किच पर
उन्हें समझाया कि मेरी किच किच के मायने क्या हैं ?
उन्हें दिखाया कि उनकी किच किच मेरी किच किच से कैसे अलग है ?
उन्हें बताया कि जायज़ है उनकी किच किच भी ,
पर हर बार दोनों की किच किच एक हो जरुरी तो नहीं |
वक़्त लगा उन्हें किच किचो के इस दौर में मेरी किच किच को समझने में |
और आज 
मेरे पिता अब भी किच किच करते हैं
जब मैं अपने सपनों से भटकने लगता हूँ |
जब मैं रुक जाता हूँ ठोकर खा कर |
जब मैं सफलता के मद में चूर हो जाता हूँ |
जब मैं खुद से किये वादों तो तोड़ने लगता हूँ
जब मैं दायरों में बांधने लगता हूँ खुद को |
जब मैं थकने लगता हूँ  |
एक दिन मैंने अपने पापा से किच किच की उनकी किच किच पर   
पर इस बार मेरे पापा ने मुझे समझाया कि इस किच किच के मायने क्या हैं ?
उन्होंने दिखाया कि इस किच किच पर उनका नजरिया क्या है ?
इस बार मुझे बताया कि ये किच किच कैसे मुझे ज़िन्दगी की बड़ी लडाइयों के लिए तैयार करेगी ?
और इस बार थोडा मैंने ज्यादा किच किच किया और वक़्त लगाया उनकी किच किच को समझने में
और आज मैं समझता हूँ कि क्यूँ जरुरी है ये किच किच
और मैं चाहता हूँ मेरे पिता ताउम्र यूँ ही किच किच करते रहें 
क्यूंकि उनकी किच किच जरुरी है ताकि मेरी ज़िन्दगी में किच किच न हो |  



Share:

2 comments:

  1. Simpaly waow..
    Writing is the best way to show your emotion ..& u did it very well.
    Yes..
    Father's "kich kich" is also very impotent in life...☺

    ReplyDelete