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Showing posts from November, 2015

आमिर खान के नाम ख़त || सत्यमेव जयते पे पलीता

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नमस्ते आमिर बाबू, कैसे हैं , जो किस्से कहानियां आप कह रहे हैं समझ सकता हूँ आप के दिल में क्या चल रहा है | सच कहूँ तो मोदी जी जिस दिन से प्रधानमंत्री बने थे मुझे यही उम्मीद थी कि यही सब देश में होने वाला था | राजनैतिक,धार्मिक,बौद्धिक स्वतंत्रता पर जिस तरह के कुठाराघात हुए हैं कई सवाल खड़े करता है ये | देश में माहौल वाकई बहुत ख़राब है | मुद्दे अब इन्टरनेट में चलने वाले पॉपअप की तरह हो गये हैं मुझे सच में याद नहीं आ रहा बिहार इलेक्शन के बाद मैंने “गाय” पर कोई अच्छी खबर या डिबेट देखी हो | भटक गये हैं हम बहुत ज्यादा | यहाँ पर लेखकों के अवार्ड वापसी पर खूब हंसी ठट्ठा हुआ क्यूंकि चाहे भले ही वो अपनी भाषा या ज्ञान के सर्वश्रेष्ट हों पर वो उँगलियों पर गिने जाने वाले चंद लोग हैं , उनका मजाक उड़ाना बहुत आसान है पर मुझे एक भी हास्य व्यंग फौजियों पर उड़ता सुनाई नहीं दिया, क्यों ? अजी वोट बैंक हैं वो पूरे देश की कई लोकसभा विधानसभा सीटों का भविष्य तय करते हैं वो फौजी | हाँ बाबू सब वोट बैंक की राजनीति है |

पर मैं आप को ये सब क्यूँ सुना रहा हूँ क्यूंकि अधिकतर बातें आप को मुझ से ज्यादा ही अच्छी तरह से पता …

एक मुसाफिर और सराय

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मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं तुम्हारी शादी में आऊंगा , तय भी था मेरा न आना पर मैं मजबूर हुआ रिया की खुद की कसम देने से...समझाया भी उसे कि कितना मुश्किल है मेरे लिए वहां जाना...पर उस ने कहा बातें बहुत पुरानी है और कभी सुखी हुई जड़ों को पानी दिखाने से वो हरी नहीं होती... रिया के बातों के जवाब नहीं थे मेरे पास और इतनी हिम्मत भी नहीं कि उस की दी कसम तोड़ दूँ ... दिल्ली से टवेरा में रात का सफर कर के सुबह शिमला पहुँचे तुम्हारे बताये हुए गेस्ट हाउस में बैग डाला और रिया सीधे ही तुम्हारे घर हो ली आखिर उस की बेस्ट फ्रेंड की जो शादी थी कोई भी रश्म कोई भी रिवाज़ को वो छोड़ना नहीं चाहती थी । मेहँदी की रात थी आज , तुम्हारे हाथों और पांव में मेहँदी लगी थी । कॉलेज के दिनों में बातों के पुलिंदों में एक बात यह भी थी क़ि तुम्हारे हाथों में मेरे नाम की मेहँदी लगेगी, पर वक़्त कहाँ किस्सागोहि पे यकीं करता है उसे कुछ और ही मंजूर था और यही है कि तुम सज धज के हाथों में किसी और के नाम की मेहँदी लगाये हो और मैं....तुम्हारी शादी का एक मेहमान ...
तुम बहुत सुन्दर लग रही हो...  मैंने कहा... और तुम ने डबडबाई हुई आँखों से कुछ वक़…

अजनबी के नाम पाती : दुनिया की खूबसूरती और विरोध की आवाज़

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हेल्लो अज़नबी
कैसी हो?क्या चल रहा है ज़िन्दगी में?
बहुत दिन हो गए थे तुम से बतियाये हुए तो आज देर रात मन हुआ तुम्हे ख़त लिखने का... दुनिया में अलग अलग तरह के लोग होते हैं पर कुछ एक लोग होते हैं जो नज़रों में रहते हैं हरवक्त । एक आम इंसान की नज़र से देखूं तो पाता हूँ कि ये सब वो जान बुझ कर करते हैं पर अगर उनके जूतों में पांव ड़ाल कर देखूं तो समझ बनती है कि उन का नजरिया ही अलग है चीजों को देखने का ,उसे बिल्कुल फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप उस के बारे में क्या सोचते हैं?
वो दुनिया को एक कैनवास की तरह देखते हैं और इंसान को कूची और इंसानियत को रंगों की तरह और इन सब के साथ वो सबसे अच्छी पेंटिंग बनाना चाहते हैं और जब भी कोई इस पेंटिग बनाने में कोई अड़चन डालता है या कोशिश करता है तो वो आवाज़ उठाते हैं। "प्रतिरोध की आवाज़""विरोध का स्वर" तरीका कुछ भी हो सकता है उन का|
और सबसे मजेदार होती है आम आदमी की प्रतिक्रिया ...अरे पहले काहे नहीं विरोध किया?
जरूर इन का काम कुछ रुक गया होगा...ब्ला...ब्ला...ब्ला...
विरोध का कोई वक़्त,तरीका नहीं होता और ये उस आदमी के ऊपर है कि वो कैसे अपना विरोध जताता है... लड़ाई…